Skip to main content

Posts

Showing posts with the label vedic astrology

मंगल ग्रह चौथे भाव में - mars 4th house

नमस्कार आज हम बात करेंगे एक ज्योतिष सूत्र की जिसमे हम समझेंगे मंगल ग्रह के चौथे भाव में बैठने के बारे में. जन्म पत्रिका में मंगल ऊर्जा का ग्रह है और मंगल ही वह ग्रह है जो अग्नि हर वक़्त व्यक्ति के आस पास रहती है चाहे वह पेट की अग्नि हो या घर की रसोई की या व्यक्ति की अंतिम अग्नि यानी चित्ता की. इससे हो कर जाना ही पड़ता है. चाहे कोई भी ग्रह हो सोना चांदी पीतल लोहा सबको आकार मंगल ही देता है. 

दही से मिलता है आकर्षण सच या झूठ ?

नमस्कार, पीछे मैंने कुछ जगह ये बात सुनी कुछ ज्योतिषियों के मुख से के दही यदि प्राइवेट पार्ट पर लगायी जाए तो काफी आकर्षण आपके अंदर आ जाता है जिससे विपरीत लिंग के लोग आपकी ओर खासकर स्त्रियाँ आकर्षित होती है. इससे आपका शुक्र मजबूत होगा और आप एक परम आकर्षक व्यक्ति बन जाएंगे.

मंगल से सांतवें भाव पर रहता है आपका ध्यान

नमस्कार, आज एक छोटे से ज्योतिष सूत्र पर बात करते है ध्यान पर. मतलब एक ऐसा विषय जो आपको सबसे ज्यादा प्रभावित करता है जीवन में उसकी आज हम बात करेंगे. कुंडली में मंगल ग्रह को मेष राशि का स्वामी माना गया है और मेष राशि जीवन की शुरुआती राशि माना गया है. मंगल ग्रह एक लड़ाका या एक सेनापति माना गया है. अब अगर आप एक सेनापति को समझे तो वो सामने वाली सेना को हर वक़्त देखता रहता है उनकी ताकत का जायजा लेता रहता है. इसलिए मंगल ग्रह फोकस का बन जाता है. अपने लक्ष्य पर हमेशा फोकस रहने वाला। जब हम किसी विषय पर ज्यादा फोकस कर लेते है तो आँखे लाल हो जाती है अब लाल आँखे भी मंगल ग्रह की मानी गयी है. 

शुक्र राहु की युति को कैसे समझे - RAHU VENUS CONJUCTION

  राहु शुक्र की युति को लेकर काफी बड़ा ज्योतिष वर्ग नेगेटिव धारणा रखता है जो की आज के समय में काफी हद तक सही भी है. आपने बहुत आंधी देखी होगी और कभी कभी बहुत ज्यादा धुल भरी आंधी भी देखी होगी. लेकिन आप इमेजिन कीजिये शाम के समय जो आंधी आती है उसमे कालापन ज्यादा  होता है और एक अजीब सा बर्ताव आपको उसमे मिलेगा। ऐसा नहीं है के उसमे कुछ रहस्य है लेकिन प्रकाश की कमी की वजह से शाम की आंधी काली आंधी बन जाती है बस इसी को असली राहु शुक्र की युति समझे. 

ज्योतिष उपाय करने के नियम

  नमस्कार, लोग अक्सर ये बात करते है कि उपाय किया मगर काम नहीं हुआ एक कभी कभी दुविधा की स्थिति ये भी रहती है के उपाय कैसे करना है उदाहरण के लिए कोई वस्तु clockwise घुमानी है या anticlockwise और किसी स्थिति में इन्हे कैसे घुमाना चाहिए ये  हम क्लियर करते है. 

कुंडली में मंगल केतु का संबंध और बुरे सपने और स्वपन सिद्धि

नमस्कार आज बात करते है जब कोई व्यक्ति बुरे सपने से परेशान रहे तो क्या ज्योतिष कारण होता है और क्या उपाय हो सकता है. 

चन्द्रमा से बारहवें भाव में बैठे ग्रह का रहस्य - secret of twelfth from moon

नमस्कार आज बात करते है कुंडली में चन्द्रमा से बनने वाले एक योग की. ज्योतिष शास्त्र में इसे अनफा योग कहते है और ये तब बनता है जब चन्द्रमा से पिछले भाव में कोई ग्रह बैठा हो. लेकिन इसमें भी समझने वाली बात है के कौन सा ग्रह चन्द्रमा के पीछे है जिससे इस योग के फल प्राप्त किये जाते है. आइये जानते है आसान शब्दों में 

राहु का चन्द्रमा के ऊपर से गोचर - Rahu transit over your natal moon in kundli

नमस्कार आज बात करते है यदि राहु ग्रह का गोचर आपकी कुंडली में बैठे चन्द्रमा के ऊपर से हो तो उसका प्रभाव मिलेगा। देखिये चन्द्रमा कल्पना की दुनिया का स्वामी है. सारी इमेजिनेशन चंद्र से जन्म लेती है और राहु खुद माया का ग्रह है तो व्यक्ति के साथ मानसिक रूप से बदलाव आते है और ये बदलाव अंदर ही अंदर रहते है. 

राहु का सूर्य के ऊपर से गोचर - Rahu transit over natal sun in birth chart

 नमस्कार आज बात करते है राहु ग्रह यदि लगन कुंडली में बैठे सूर्य के ऊपर से गोचर करे तो क्या फल प्राप्त हो सकते है. राहु एक वक्री ग्रह है और सूर्य हमेशा मार्गी रहने वाला ग्रह। 

पिछला जन्म और केतु - ketu and our past life curse

नमस्कार आज बात करते है केतु और पिछले जन्म के संबंध के बारे में. देखिये कुंडली का हर ग्रह किसी न किसी पिछले जन्म की घटना से जुड़ा होता है लेकिन कुछ घटनाये ऐसी होती है जो इस जन्म में दोष या एक लोन बनकर सामने आकर खड़ी हो जाती है जिनका यदि निवारण ना किया जाए तो बाकी उपाय भी काम के नहीं रहते। 

मंगल के तत्व से जाने इंसान की छिपी ताकत - mars element power in astrology

राम राम दोस्तों  आज बात करते है एक छोटे से विषय की के मंगल आपकी कुंडली में किस तत्व में है.  मंगल ही क्यों ? जब आपके सामने कोई मुसीबत आती है या कोई काम आपके पास आता है तो आप उसे कैसे हैंडल करते है वो आपकी कुंडली मंगल की प्रकृति पर निर्भर करता है. लेकिन यंहा प्रकृति का मतलब मंगल के तत्व से है. जन्म पत्रिका में हर राशि के तत्व होते है मूल रूप से 4 तत्व जन्म कुंडली में देखे जाते है.  मंगल मूल कुंडली में शुरुआत यानी पहला भाव और अंत यानी के आंठवे भाव का स्वामी है. हम कैसे किसी कार्य की शुरआत करते है कैसे रियेक्ट करते है ये मगल के तत्व से पता चलता है और यदि इस प्रकृति को समझ लिया जाए तो व्यक्ति अपनी कार्य करने के तरीके को जानकार उसमे सुधार कर सकता है जिससे सफलता उसे बहुत जल्दी मिल सकती है. यंहा प्रश्न आता है के मंगल के भाव को भी देखा जाना चाहिए देखिये मंगल जिस भाव में बैठा है उस भाव में हम अपनी ऊर्जा निकालते है वंहा अपना उत्साह व्यक्त करते है. लेकिन प्रेरणा मंगल अपने तत्व अनुसार लेगा और राशि अनुसार मंगल की प्रकृति बनेगी.  सबसे पहले बात करते है अग्नि तत्व की, जब मंगल मेष - सिंह - धनु राशि में

ads